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श्रीकृष्ण ने दुष्टों का नाश करने के लिए ही धरती पर जन्म लिया था : राघवेंद्र शास्त्री

Deoria News : देवरिया के सलेमपुर के टीचर कालोनी में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन पं राघवेंद्र शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा में भक्तों को श्री कृष्ण जन्म की कथा सुनाई। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा भक्तों को श्रवण कराते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो अपने आप जेल के ताले खुल गए और वासुदेव की बेड़ियां खुल गईं।

वासुदेव भगवान ने श्रीकृष्ण इस संसार के पालनहार हैं। एक टोकरी में लेकर यमुना नदी को पार कर यशोदा मां और नंदलाल के पास छोड़ जाते हैं। इसकी खबर कंस को नहीं लग पाती। भगवान श्रीकृष्ण ने दुष्टों का नाश करने के लिए ही धरती पर जन्म लिया था। उन्होंने इस धरती को अधर्म से मुक्ति दिलाई।

पंडित शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल में जन्म लेने पर “नन्द के आनंद भयों जय कन्हैयालाल की हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की सहित अनेक भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को आनंदित कर दिया। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने माखन मिश्री का प्रसाद लगाकर जमकर उत्सव मनाया गया।

उक्त अवसर पर मुख्य यजमान त्रियुगी नारायण पाण्डेय, अजय पाण्डेय, अजय दूबे वत्स, नरसिंह तिवारी, सुभाष तिवारी, मणि तिवारी, भगवान तिवारी, बिमलेश तिवारी, गंगेश्वर नाथ तिवारी, डा जनार्दन शुक्ला, डा प्रद्युम्न पाण्डेय, डा वेदव्यास तिवारी, केपी गुप्ता, अजय पाण्डेय, डा अयनांशु पाण्डेय, भोला शर्मा, सत्येन्द्र मणि त्रिपाठी, रमाकांत मिश्र भोला, हितेंद्र कुमार तिवारी, करुणेश मिश्र, अदालत यादव, त्रिलोकी नाथ तिवारी, महेश तिवारी, जीवन शरण मिश्र, तारकेश्वर मणि त्रिपाठी, विरेन्द्र तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

नर्क से बचने का एकमात्र तरीका है भगवत भजन
श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन गुरुवार को कथा व्यास पं राघवेंद्र शास्त्री ने कहा कि नर्क से बचने का एकमात्र सरल तरीका है भागवत भजन। जो जीव भगवत भजन करेगा, जो भगवान के नाम में विश्वास रखता है, वो आसानी से भव सागर से तर जाता है। भगवान पर जितना विश्वास करोगे, उतना ही अच्छा है। परमात्मा ही परम सत्य है।

कथा व्यास ने कहा कि ध्रुव और प्रहलाद जैसे भक्तों को भी घोर कष्टों का सामना करना पड़ा था। लेकिन कठिन दौर में भी उन्होंने भगवान के नाम का सहारा नहीं छोड़ा था। रात्रि कालीन कथा में शास्त्री जी ने श्रोताओं को बताया कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए आयु का बंधन नहीं होता है। ध्रुव जी ने अल्प आयु में ही भगवान के दिव्य दर्शन प्राप्त किए थे।

व्यास ने कहा कि हमें इस जीवन की वास्तविकता को समझकर हर क्षण अच्छे कर्म और भगवान का भजन करते रहना चाहिए। उन्होंने परमात्मा को प्राप्त करने के दो मार्ग बताए। पहला सद्मार्ग जिसको चुनकर भक्त प्रहलाद ने ईश्वर को प्राप्त किया। दूसरा असद मार्ग जिसको अपनाकर हिरण्यकश्यप ने मोक्ष की प्राप्ति की।

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