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Gorakhpur Siliguri Expressway को लेकर लगने लगे कयास : प्रभावित हजारों गांवों के किसानों की बढ़ी चिंता, जानें वजह

Deoria News : पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी को जोड़ने वाले करीब 520 किमी लंबे गोरखपुर सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (Gorakhpur Siliguri Greenfield Expressway) को लेकर अब लोगों में ऊहापोह की स्थिति बनने लगी है। इस एक्सप्रेस-वे के रूट में पड़ने वाले सभी जनपदों के प्रभावित हजारों गांवों के किसान भूमि अधिग्रहण शुरू न होने से चिंतित हैं। सभी प्रभावित कृषक एनएचएआई (NHAI) से फाइनल अपडेट का इंतजार कर रहे हैं।

कयास लगने लगे हैं
इस एक्सप्रेस वे को लेकर कयासों का बाजार गर्म होने लगा है। गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक बीच में पड़ने वाले सभी जनपदों में चर्चा आम है कि इस एक्सप्रेस वे की फाइनल डीपीआर आने के बाद रूट में बड़े स्तर पर बदलाव हो जाएगा। इससे फिलहाल प्रभावित हो रहे गांव रूट से बाहर हो जाएंगे। देरी की वजह से दूसरी अफवाहें भी लोगों के बीच फैल रही हैं।

नुकसान उठाना पड़ेगा
इस उलझन की वजह से प्रस्तावित डीपीआर में आने वाले हजारों गांवों के किसान परेशान हैं। दरअसल धान की कटाई के बाद गेहूं, गन्ना और दूसरे फसलों की बुवाई शुरू होगी। मगर स्थानीय अधिकारियों ने प्रभावित गांवों के किसानों से चिन्हित जमीनों में अगली फसल नहीं लगाने के निर्देश दिए हैं। किसानों के लिए यही बड़ी चिंता है। उनका कहना है कि अगर फाइनल डीपीआर में संशोधन हुआ और उनकी जमीन रूट से बाहर हुई, तो उन्हें फसल नहीं पैदा करने से नुकसान होगा।

बुवाई नहीं करने के निर्देश
गोरखपुर सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे में पड़ने वाले जिला कुशीनगर के एक गांव के किसान ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें चिन्हित भूमि में अगली फसल नहीं उगाने के लिए कहा है। जबकि स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रस्तावित डीपीआर के मुताबिक हमारी जमीन चिन्हित की गई है। लेकिन ऐसी अफवाह सुनने में आ रही है कि फाइनल डीपीआर में संशोधन के चलते रूट में काफी फेरबदल होगा। ऐसे में हमारी जमीन बाहर होने का भी डर है। फसल नहीं लगाने से हमें भारी नुकसान होगा।

असमंजस में हैं किसान
कुशीनगर के ही एक-दूसरे प्रभावित गांव के किसान ने बताया कि अब तक ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। अभी मुआवजे की रकम को लेकर भी कुछ स्पष्ट नहीं है। बिहार के किशनगंज जिले के एक कॉलर ने फोन पर बताया कि वहां के लोगों के बीच ऐसी अफवाह उड़ाई जा रही है कि अब प्रस्तावित डीपीआर के अनुसार एक्सप्रेस वे रूट न बनकर दूसरे जगहों से गुजरेगा। इस तरह के अनेक वजहों से किसान असमंजस में हैं।

ये है प्लान
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण National highways authority of India (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of road transport and highways) इस तैयारी में हैं कि डीपीआर (Detailed Project Report -DPR) को फाइनल अप्रूवल मिलने के तुरंत बाद इस महत्वपूर्ण एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू हो जाए। इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे (Gorakhpur Siliguri Greenfield Expressway) की डीपीआर भोपाल की एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (LN Malviya Infra Projects Private limited Bhopal) ने तैयार किया है।

साल 2025 तक तैयार करने का लक्ष्य
करीब 30000 करोड़ रुपए से तैयार होने वाले इस 6 लेन के ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के तैयार होने के बाद उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से वेस्ट बंगाल के सिलीगुड़ी तक का सफर सिर्फ 6 घंटे में तय किया जा सकेगा। इस महत्वपूर्ण एक्सप्रेस-वे का निर्माण भारतमाला योजना के तहत कराया जाएगा। यह करीब तीन साल में बन कर तैयार हो जाएगा। साल 2022 के आखिर में निर्माण कार्य शुरू कर वर्ष 2025 तक इसे तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

111 गांवों की जमीन जाएगी
गोरखपुर से कुशीनगर, देवरिया होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित एक्सप्रेस-वे के पहले चरण का सर्वे पूरा कर लिया गया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highways) ने 2 अगस्त को सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति के लिए अधिसूचना जारी की थी। विकास के इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए गोरखपुर मंडल के 3 जिलों के 111 गांवों में जल्द जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी। 520 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे का 84 किमी हिस्सा गोरखपुर मंडल से होकर गुजरेगा।

चिन्हित किया गया
एक्सप्रेसवे तीन जिलों गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया के जिन 111 गांवों से गुजरेगा, उसमें गोरखपुर जनपद के चौरीचौरा तहसील के 14, कुशीनगर के हाटा तहसील के 19, कसया तहसील के 13 व तमकुहीराज तहसील के 42 और देवरिया जिले के सदर तहसील के 23 गांव शामिल हैं। सीएम द्विवेदी परियोजना निदेशक एनएचएआई कार्यालय गोरखपुर ने बताया कि सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति के संबंध में अधिसूचना 2 अगस्त को जारी की गई है। प्राथमिक सर्वे के बाद जिन गांवों में अधिग्रहण प्रस्तावित है, उसे चिन्हित कर लिया गया है। हालांकि इसमें परिवर्तन संभव है। एक्सप्रेस-वे की जरूरत को देखते हुए 60 से लेकर 100 मीटर चौड़ाई में जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा।

इन जिलों से गुजरेगा
एक्सप्रेसवे की शुरुआत यूपी के गोरखपुर में प्रस्तावित रिंग रोड के जगदीशपुर से होगी। यहां से यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे देवरिया, कुशीनगर और बिहार के गोपालगंज, सीवान, छपरा, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, सहरसा, पूर्णिया, किशनगंज और मधेपुरा होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाएगा। बताते चलें कि फिलहाल गोरखपुर से सिलीगुड़ी के लिए एनएच 27 पर सफर करना पड़ता है। लेकिन इस हाईवे पर वाहनों का अत्यधिक दबाव है। इस वजह से वाहन पूरी रफ्तार से नहीं चल पाते और इस यात्रा में 12-15 घंटे लग जाते हैं।

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