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Space Tourism : देश में स्पेस टूरिज्म को नियंत्रित करने वाला कोई कानून नहीं, न ही बनाने का प्लान बना रही सरकार

New Delhi : भारत सरकार ने कहा है कि इस समय देश में अंतरिक्ष पर्यटन (space tourism) को नियंत्रित करने वाले कोई कानून नहीं हैं और अंतरिक्ष पर्यटन के लिए विशिष्ट कानून बनाने की किसी प्रकार की योजना नहीं है। हालांकि ‘गगनयान’ मिशन के एक हिस्से के रूप में भारत मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकियों और चालक दल के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल विकसित कर रहा है।

गुरुवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने सरकार की तरफ से जवाब दिया।

आधार के रूप में काम करेंगी

उन्होंने कहा कि भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संस्थान (Indian Space Research Organization – ISRO) वर्तमान में मानव मूल्यांकित (रेटेड) प्रक्षेपण (लॉन्च) वाहन, कक्षीय (ऑर्बिटल मॉड्यूल), जीवन रक्षक सहायता प्रणाली (लाइफ सपोर्ट सिस्टम), चालक दल बचाव प्रणाली (क्रू एस्केप सिस्टम), मानव केंद्रित उत्पाद और गगनयान मिशन के लिए चालक दल (क्रू) रिकवरी के लिए तकनीक विकसित कर रहा है। ये सभी प्रौद्योगिकियां भविष्य में अंतरिक्ष पर्यटन को आगे बढ़ाने के लिए आधार (बिल्डिंग ब्लॉक्स) के रूप में काम करेंगी।

15 स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं

वैश्विक ग्राहकों को उपग्रह सेवाएं प्रदान करने वाले निजी स्टार्ट-अप से संबंधित एक अन्य प्रश्न के जवाब में डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि उपग्रह डेटा के माध्यम से उपग्रह सेवाओं यानी मूल्य वर्धित सेवाओं को उपलब्ध कराने के क्षेत्र में लगभग 15 स्टार्ट-अप काम कर रहे हैं।

डेटाबेस के रूप में काम करेगा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (आईएन–एसपीएसीई) भारतीय स्टार्ट-अप की क्षमता मैट्रिक्स के निर्माण के लिए एक सर्वेक्षण कर रहा है, जो अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी गतिविधियों के लिए निश्चित डेटाबेस के रूप में काम करेगा।

सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) पर विचार कर सकती है

वर्ष 2020 में सरकार द्वारा घोषित अंतरिक्ष सुधारों के आलोक में अंतरिक्ष क्षेत्र में शुरू से अंत तक गतिविधियों को मूर्त रूप देने में गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) की अधिक भागीदारी की परिकल्पना की गई है। इन सुधारों के अंतर्गत, सरकार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की प्रगति के लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) पर विचार कर सकती है।

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