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Uttar Pradesh : यूपी में फ्री हुआ इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन, हर जिले में बनेंगे 20 चार्जिंग स्टेशन

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Uttar Pradesh : यूपी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 को स्वीकृत कर दिया है। यह नीति अगले 05 वर्ष के लिए प्रभावी होगी। मंत्रिपरिषद ने नीति में संशोधन करने की आवश्यकता की दशा में उच्च स्तरीय प्राधिकृत ईवी समिति की अनुशंसा पर मुख्यमंत्री के अनुमोदनोपरान्त यथावांछित संशोधन की अनुमति भी प्रदान की है।


उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 का उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए अनुकूल ईको-सिस्टम के सृजन के लिए एक ढांचा प्रदान करना है। नीति के 03 मुख्य घटक, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के निर्माण को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के प्रयोग को प्रोत्साहन देना तथा इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) बैटरी विनिर्माण को प्रोत्साहन देना है।

इस नीति के क्रियान्वयन के फलस्वरूप इलेक्ट्रिक मोटर वेहिकल, बैटरी विनिर्माण के क्षेत्र में वृहद निवेश की सम्भावना है। इस नीति से प्रदेश में स्थाई एवं स्वच्छ गतिशीलता समाधान के अंगीकरण एवं अवस्थापना सुविधाओं के विकास तथा पर्यावरणीय अनुकूल परिवहन प्रणाली के उपयोग के प्रोत्साहन में मदद प्राप्त होगी।


नीति की प्रभावी अवधि में प्रत्येक जनपद में न्यूनतम 20 चार्जिंग स्टेशन एवं 5 स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए निवेश के समन्वय व सुविधा के लिए इन्वेस्ट यूपी (Invest UP) को नोडल एजेंसी के रूप में नामित किया जाएगा। चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के निर्माण के प्रोत्साहन के तहत समस्त स्वीकृतियां अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में गठित प्राधिकृत समिति (ईसी) इन्वेस्ट यूपी की अनुशंसा पर जारी की जाएगी।


नीति अधिसूचित किये जाने के 3 वर्ष के भीतर उत्तर प्रदेश राज्य में क्रय एवं पंजीकृत किए गए इलेक्ट्रिक वाहनों के क्रय एवं पंजीकरण पर 100 प्रतिशत की दर से छूट प्रदान की जाएगी। चौथे एवं पांचवें वर्ष में उत्तर प्रदेश में विनिर्मित, क्रय किये गये एवं पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 प्रतिशत की दर से छूट प्रदान की जाएगी।


उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 के प्रख्यापन से रोजगार सृजन, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों का विकास, फॉरेन एक्सचेंज की बचत तथा प्रदेश व देश की जीडीपी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। नीति से प्रदेश में लगभग 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश होने की सम्भावना है। यह नीति 01 लाख व्यक्तियों के लिए प्रत्यक्ष रूप से तथा 05 लाख व्यक्तियों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार सृजन में सहायक होगी।

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