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पिछले एक दशक में खेलों के प्रति सरकार और समाज दोनों की सोच में बदलाव आया: पीएम मोदी

Varanasi News : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते दिन डॉ सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स स्टेडियम, सिगरा, वाराणसी में आयोजित 72वीं ‘सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैम्पियनशिप’ का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सम्मिलित हुए।

प्रधानमंत्री ने आयोजित कार्यक्रम को वर्चुअली सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्हें वाराणसी से सांसद होने के नाते सभी खिलाड़ियों का स्वागत और अभिनन्दन करते हुए प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। देश के 28 राज्यों की टीमें 72वें ‘सीनियर नेशनल वॉलीबॉल चैम्पियनशिप’ में एकत्रित हुईं हैं, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का सुन्दर चित्र प्रस्तुत करती हैं। खिलाड़ी अथक परिश्रम के बाद इस राष्ट्रीय टूर्नामेन्ट तक पहुंचे हैं। आने वाले दिनों में वाराणसी के मैदान पर उनके परिश्रम की परीक्षा होगी।

पीएम मोदी ने कहा कि वॉलीबॉल कोई साधारण खेल नहीं, बल्कि सन्तुलन और सहयोग का खेल है, जहां गेंद को हमेशा हवा में रखने के प्रयास में दृढ़ संकल्प की झलक दिखती है। वॉलीबॉल खिलाड़ियों को टीम भावना से जोड़ता है, जहां प्रत्येक खिलाड़ी ‘टीम पहले’ के मंत्र से प्रेरित होता है। भले ही प्रत्येक खिलाड़ी के पास अलग-अलग कौशल हों, लेकिन सभी अपनी टीम की जीत के लिए खेलते हैं। उन्होंने भारत के विकास की कहानी और वॉलीबॉल के बीच समानताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह खेल हमें सिखाता है कि कोई भी जीत अकेले प्राप्त नहीं होती, बल्कि जीत समन्वय, विश्वास और टीम की तैयारी पर निर्भर करती है। सफलता तभी मिलती है, जब प्रत्येक खिलाड़ी गम्भीरता से अपनी जिम्मेदारी निभाता है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता से लेकर डिजिटल भुगतान तक, ‘एक पेड़ मां के नाम’ से लेकर विकसित भारत अभियान तक, प्रत्येक नागरिक, प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक प्रान्त की सामूहिक चेतना और ‘भारत पहले’ की भावना के साथ काम करते हुए देश प्रगति कर रहा है। आज पूरी दुनिया भारत के विकास और अर्थव्यवस्था की सराहना कर रही है। यह प्रगति केवल आर्थिक मोर्चे तक ही सीमित नहीं, बल्कि खेल जगत में दिख रहे आत्मविश्वास में भी झलकती है। हाल के वर्षों में, वर्ष 2014 से विभिन्न खेलों में भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। मुझे जेन-जेड खिलाड़ियों को मैदान पर तिरंगा फहराते देखकर गर्व की अनुभूति होती है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूर्व की सरकार और समाज में खेलों के प्रति उदासीनता के कारण खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती थी, जिससे बहुत कम युवा खेलों को अपना करियर बनाते थे। विगत एक दशक में खेलों के प्रति सरकार और समाज दोनों की सोच में बदलाव आया है। सरकार ने खेल के बजट में उल्लेखनीय वृद्धि की है। आज भारत का खेल मॉडल ‘खिलाड़ी-केन्द्रित’ हो गया है, जिसमें प्रतिभा की पहचान, वैज्ञानिक प्रशिक्षण, पोषण और पारदर्शी चयन पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि खिलाड़ियों के हितों को प्रत्येक स्तर पर प्राथमिकता दी जाए।

उन्होंने आगे कहा कि आज देश में प्रत्येक क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है और खेल भी उनमें से एक है। सरकार ने खेल के क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए हैं, जिनमें राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम और खेलो भारत नीति-2025 शामिल हैं। इनसे प्रतिभाओं को अवसर मिलेंगे और खेल संगठनों में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे युवाओं को खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में एक साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। ’टॉप्स’ (टॉरगेट ओलम्पिक पोडियम स्कीम) जैसी पहल भारत में खेल जगत को बदल रही हैं। इसमें मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार करने, वित्तपोषण तंत्र विकसित करने और युवा खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने पर ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है।

पीएम ने कहा कि विगत एक दशक में भारत ने अपने कई शहरों में 20 से अधिक प्रमुख अन्तरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी की है, जिनमें फीफा अण्डर-17 विश्व कप, हॉकी विश्व कप और प्रमुख शतरंज टूर्नामेंट शामिल हैं। वर्ष 2030 के राष्ट्रमण्डल खेल भारत में आयोजित किए जाएंगे। देश वर्ष 2036 के ओलम्पिक खेलों की मेजबानी के लिए भी प्रयासरत है, जिसका उद्देश्य अधिक से अधिक खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धा करने के बेहतर अवसर प्रदान करना है। विद्यालय स्तर पर भी युवा खिलाड़ियों को ओलम्पिक खेलों से परिचित कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘खेलो इण्डिया’ अभियान के माध्यम से सैकड़ों युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। कुछ दिन पूर्व ‘सांसद खेल महोत्सव’ का समापन हुआ, जिसमें लगभग एक करोड़ युवाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ‘सांसद खेल महोत्सव’ के दौरान वाराणसी के लगभग तीन लाख युवाओं ने मैदान पर अपनी ताकत और कौशल का प्रदर्शन किया। वाराणसी में आधुनिक खेल सुविधाएं विकसित की जा रहीं हैं। खेलों के लिए स्टेडियम बनाये जा रहे हैं। सिगरा स्थित स्टेडियम कई आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। यह खेल परिसर प्रदेशवासियों सहित आस-पास के जिलों के खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त करने के अवसर प्रदान कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि वाराणसी खेल प्रेमियों का शहर है। यहां कुश्ती, मुक्केबाजी, नौका-दौड़ और कबड्डी बहुत लोकप्रिय हैं। वाराणसी ने राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ी दिए हैं। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, यूपी कॉलेज और काशी विद्यापीठ जैसे संस्थानों के खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। हजारों वर्षों से वाराणसी ज्ञान और कला की खोज में आने वाले लोगों का स्वागत करता आया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सीनियर राष्ट्रीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता के माध्यम से वाराणसी का देश के खेल नक्शे पर स्थान बनाना शहर के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है। इससे पूर्व, वाराणसी ने कई महत्वपूर्ण आयोजनों की मेजबानी की है, जिससे स्थानीय लोगों को पर्याप्त अवसर और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है। ‘जी-20’ की बैठकें, ‘काशी तमिल संगमम्’ और ‘काशी तेलुगु संगमम्’ जैसे सांस्कृतिक उत्सव, ‘प्रवासी भारतीय सम्मेलन’ और ‘शंघाई सहयोग संगठन’ की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में वाराणसी का नाम शामिल है। इन उपलब्धियों में यह चैम्पियनशिप और जुड़ रही है। ऐसे आयोजन वाराणसी को बड़े मंचों के लिए एक प्रमुख गन्तव्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने चैम्पियनशिप के सभी प्रतिभागियों को टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया तथा शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि वाराणसी की धरती से लगाया गया हर स्पाइक, ब्लॉक और प्वॉइन्ट भारत की खेल आकांक्षाओं को और ऊंचा करेगा।

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